मकर संक्रांति 2017 और शुभ मुहूर्त पूजा विधि मन्त्र सहित

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हर वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया हाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन खिचड़ी खाने या तिल का दान करने की परंपरा क्यों शुरु की गई या यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है? नहीं तो चलिए जानते हैं मकर संक्रांति से जुड़ी कई विशेष बातें।

क्यों कहलाता है मकर संक्रांति

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना। अत: वह राशि जिसमें सूर्य प्रवेश करता है, संक्रान्ति की संज्ञा से विख्यात है।

14 जनवरी

14 जनवरी के दिन या इसके आसपास सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य करने का विधान है, मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और मनुष्य के पुण्य-कर्मों में वृद्धि होती है।

हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म के अनुसार संसार के दिखाए देने वाले देवों में से एक भगवान सूर्य की गति इस दिन उत्तरायण हो जाती है। मान्यता है कि सूर्य की दक्षिणायन गति नकारात्मकता का प्रतीक है और उत्तरायण गति सकारात्मकता का। गीता में यह बात कही गई है कि कि जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है, उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं। इसके अलावा महाभारत काल के भीष्म पितामह ने भी अपना देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के पावन दिन का ही चयन किया था।

आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक महत्व होने के साथ इस पर्व को लोग प्रकृति से जोड़कर भी देखते हैं जहां रोशनी और ऊर्जा देने वाले भगवान सूर्य देव की पूजा होती है।

मकर संक्रांति 2017 और शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति का पर्व वर्ष 2017 में 14 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति के दिन पुण्य काल में दान देना, स्नान करना या श्राद्ध कार्य करना शुभ माना जाता है। इस साल यह शुभ मुहूर्त 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 05 बजकर 57 मिनट तक का है। (शुभ मुहूर्त दिल्ली समयानुसार है।)

मकर संक्रांति के व्रत की संक्षिप्त विधि का वर्णन भविष्यपुराण में मिलता है। इसके अनुसार सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए। संक्रांति के तिल को पानी में मिलाकार स्नान करना चाहिए, अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

साथ ही संक्रांति के पुण्य अवसर पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण अवश्य प्रदान करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद भगवान सूर्यदेव का स्मरण करना चाहिए। इनका स्मरण करने के लिए गायत्री मंत्र के अतिरिक्त निम्न मंत्रों से भी पूजा की जा सकती है: ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम:

अन्य मंत्र हैं- ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , ऊं विष्णवे नम